कभी ना कभी तो मिलोगे…यकीं है !!
लेखक: गौरव शर्मा
बात उन दिनो की है जब मैं छोटा सा बच्चा था मेरी उम्र भी लगभग 15-16 साल की रही होगी..मैं अपने घर की छत पे टहल रहा था और हल्की आवाज मे गुनगुना रहा था, कि अचानक मैने देखा की एक लडकी जो मेरे घर से कुछ ही दूरी पे थी वो भी अपनी छत पे घूम रही थी और मुझे ऐसा लगा जैसे वो मुझे ही देख रही हो.. मैने उसको देखते ही गुनगुना ना बंद कर दिया और चुप चुप के उसको देखने की कोशिश करने लगा, मैने उस लडकी को पहले कभी नही देखा था शायद वो अभी ही वहाँ आयी होगी.. कुछ देर बाद मैं नीचे उतरकर आया और स्कूल का प्रोजेक्ट पूरा करने लगा..
रात को खाना खा कर मैं अपने रूम मे गया और हल्की अवाज मे म्यूजिक सनने लगा..लेकिन मुझे बार बार उस लडकी की याद आने लगी, मैं उस लडकी से बात करने की सोचने लगा लेकिन समझ ही नही आया ही कैसे बात करू उस लडकी से.. यही सोचते सोचते मैं उस रात सो गया.. और कुछ देर बाद वो लडकी मेरे घर आयी और मेरे पास आकर बैठ गयी, मुझे समझ ही ना आया कि वो क्यों मेरे घर आयी है मैंने उससे पूछने की कोशिश की लेकिन उसने मेरे मुँह पे हाथ रखा और कहा चुप रहो और आराम से सोते रहो, मैं बाद मे आऊँगी इतना बोलकर वो वहाँ से चलने लगी लेकिन जैसे हि वो मेरे पास से उठकर चलने लगी तो मैने उसका हाथ पकड़ कर उसे रोकने की कोशिश की और उससे कहा कि अपना नाम तो बता दो और कहाँ से आयी हो तुम? पहले तो मैने कभी तुमको यहाँ नही देखा..उसने बिना कुछ बोले ही मेरा हाथ हटाया और कहा मैं कल फिर आऊँगी और तब ही बता दूँगी.. और वो वहाँ से चली गयी…
कुछ देर बाद मेरी आंख खुली और देखा की सवेरा हो चुका है और मेरे पास ही मेरी मम्मी बैठी हुई थीं.. मेरे चेहरे पे हल्की सी मुस्कान देखकर मेरी मम्मी ने कहा क्या हुआ? इतना मुस्कुरा क्यों रहा है?
क्या देख लिया सपने मे ऐसा जो इतना खुश है, मैने मजकिया शब्द मे कहा मैने देख ली अपने सपनो की रानी..!
मम्मी ने कहा चुप और फटाफट फ्रेश हो जाकर.. मै नहाने चला गया लेकिन वहाँ भी वो लडकी मेरे आस पास घूमती रही..
हर जगाह मुझे ऐसा लगने.लगा जैसे वो मुझे कहीं चुप के.से देख रही हो, उसको एक बार देख कर ही
मेरे दिल के रंग ओ ढंग सब बदल गया.. मैं पहले से ज्यदा खुश रहने लगा, मैं स्कूल गया और वहाँ से घर आने की इतनी जल्दी थी या शाम को छत पे उस लडकी को देखने की, मुझे ना पता लेकिन स्कूल से घर आने के बाद मैं शाम होने का इंतजार करने लगा और वो पल भी आगया जिसको मुझे कल से इंतजार था.. मैं छत पे उसको देखने को चल दिया लेकिन काफ़ी देर तक मैं उसको देखने को तरसता रहा लेकिन वो उस दिन मुझे दिखयी ही नही दी.. उस रात मुझे नींद भी नही आयी, रात भर मुझे यही डर लगता रहा कि कहीं वो चली ना गयी हो जहाँ से वो आयी थी वहाँ पर…
रात भर गाना अपने कानो मे बजाया तब जाकर समझ आया कि मेरे साथ ये क्या होने लगा, कहीं मुझे उसकी आदत तो नही हो गयी थी.. लेकिन जैसे तैसे मुझे नींद आयी और मै सो गया..
और फ़िर वही स्कूल जाना और शाम छत पे उसका इंतजार करना., रोज शाम को छत पे जाना मानो मेरी जिन्द्गी का इक हिस्सा बन गया हो, और उस लडकी के बिना मुझे अपनी जिन्द्गी भी अधूरी सी लगने लगी..
हर दिन यही होता रहा दिन भर उस का इंतजार और शाम को सिर्फ मायुसी..
ऐसे ही दिन गुज़रते रहे लेकिन वो लडकी मुझे दुबारा देखने को ना मिली..
इसी बीच मैने उसको भूलकर अपनी नयी ज़िंदगी शुरू की.. मैने लिखना शुरू किया..
दो साल बाद-
वो पल फिर से आये मेरी जिन्द्गी मे जिन्हे भूलना मेरे लिये इतना आसान नही था.. जिसको मैं भूल चुका था वो फ़िर से मेरी जिन्द्गी मे बापस आने लगा.. मैने उस लडकी को पूरे दो साल बाद देखा.. उसको पहचान ना इतना आसान ना था लेकिन क्या कोई अपने प्यार को भी भूल सकता है, नही! मैने अपने प्यार को देखते ही पहचान लिया..
उसके साथ इक लडकी और थी मैं उसको भी नही जानता था.. उसने मेरे से कहा आप वही गौरव हैं, ना? जिसकी स्पीड ब्रेकर नाम की बुक अभी प्रकाशित हुई है मैने कहा हाँ, सही पहचाना वही हुँ मैं..
बस इतनी ही बात हो सकी और मैं वहाँ से चला गया..
अब वो लडकी मुझ से रोज मिलने लगी, वो बातें बहुत अच्छी अच्छी किया करती थी इसी कारण मुझे भी उससे मिलना अच्छा लगने लगा..
उसका नाम शीना था.. एक दिन मैने शीना से कहा की वो लडकी कौन है जिसके साथ तुम ज्यदातर रहती हो, शीना ने कहा की वो मेरी बहन है और उसका नाम मेघा है..
मै मेघा के बारे मे सब कुछ जानना चाहता था.. इसी बजाह से बार बार शीना से मैं मेघा के बारे मे बात करता था..
एक दिन मैने शीना से कहा-
आज से दो साल पहले भी मेघा यहाँ आयी थी ना?
उसने कहा हाँ हम दोनो आये थे लेकिन सिर्फ एक दिन ही यहाँ रुके थे,
मैने कहा अच्छा तो अब कब तक यहाँ रुकोगे?
शीना बोलि, अब तो यहाँ ही रहेंगे क्योंकि मेघा अब यहाँ ही अपना bsc करेगी, मैने कहा ठीक है फ़िर,!!
मेरी और शीना की ऐसे ही बात होती थी हमेशा कभी वो मेरी बुक पडने को लेजाती तो कभी किसी बहाने से वो मुझे फोन करती रहती थी…
मैं धीरे धीरे मेघा के बारे मे सब कुछ जान चुका था लेकिन कभी मेघा से आमने सामने बैठ के बात करने का मौका नही मिला..
धीरे धीरे यूँही दिन गुज़रते रहे.. और शीना मेरे पास आती रही..
ठीक एक साल बाद-
शीना ने मुझ से कहा की मैं आपसे प्यार करने लगी हुँ, मैने कहा ये सब क्या बोल रही हो, उसने कहा हाँ मैं सच बोल रही हूँ.. आप मुझे अच्छे लगते हैं
मैने शीना की बात पे ज्यदा ध्यान ना देते हुए चुप चाप वहाँ से चला गया..
मेरी समझ ही नही आ रहा था कि अब मैं क्या करू?
शीना रोज रोज मुझ से यही सब पूछती रही की आप ने अभी तक अपना जवाब नही दिया और मैं बार बार उसकी बात टालता रहा..
एक दिन मैने सोच कि शीना को सब कुछ सच सच बता दूँ की मैं उससे नही उसकी बहन मेघा से प्यार करता हुँ और सिर्फ मेघा की बजाह से ही उससे बात करता हुँ क्योंकी जानता हुँ शीना की कारण ही मैं मेघा को इतना जान सका हुँ… लेकिन जब भी मैं शीना से बात करता था तो उसकी प्यारी बातें सुन कर कभी उसका दिल तोडने की हिम्मत ही नही हुई, मुझको पता था की वो मुझे बहुत प्यार करती है.. और ये सब सुन कर और मेरे बारे मे जान कर उसको बहुत दुख होगा.. इसलिये कभी उसको नही बताया.. और मैं सब कुछ ऐसे ही देखता रहा जो हो रहा था वो सही नही हो रहा था लेकिन मैं करता भी तो क्या..?
फिर एक दिन मुझे मेघा से बात करने का मौका मिला, जब से उसको पहली बार देखा था तब से तीन साल बाद उससे बात करने का मौका मिला.. इन तीन साल मे मैने पहली बार अपने प्यार की आवाज सुनि थी.. शीना से मेघा के बारे मे मैं सब कुछ जान चुका था और ये तो पता ही था की अगर मैं मेघा से बात करू तो वो मुझ से बात जरुर कर लेगी.. लेकिन कभी ऐसा मौका हि ना मिला था कि मैं मेघा से बात कर सकूँ.. लेकिन इन तीन साल मे पहली बार मेघा मेरे सामने थी, सिर्फ मेरी बात सुनने के लिये…
मैं मेघा से कुछ बोल पाता उससे पहले ही उसकी डरी हुई आवज ने मुझे कुछ बोलने से रोक लिया और पता नही क्यों वो इतना सहम सी गयी और अचानक वहाँ से चलने लगी..
वो मेरे से कुछ ही दूर जा सकी थी कि मैने उसको रोक लिया और पूछा कि क्या हुआ है?
उसने कोई जवाब ना दिया लेकिन मैने आज दिल मे ठान ली थी की आज मेघा को अपने दिल की बात जरुर बता के जाऊँगा..
मैने उसके दोनो हाथ को अपने हाथ मे लिया और कहा कि मै तुमसे बहुत प्यार करता हुँ आज से तीन साल पहले जब तुमको देखा था तब से ही तुम्हे अपना मान बैठा हुँ, हर पल तुम्हारी शक्ल मेरे सामने रहती है और तुम्हारे बिन मै सिर्फ अधूरा हुँ, सिर्फ अधूरा..
ये सब सुन कर जो उसने कहा वो मैं कभी भूल नही पाया, और उसकी कही हुई बातें सुन कर कभी उसको पीछे मुड़कर नही देखा और आज तक किसी से कुछ ना कहा..की कौन थी वो पागल?
आज मेघा कहाँ है कोई नही जानता… लेकिन दिल मे अभी भी एक छोटी सी आशा है…
कि कभी ना कभी तो मिलोगे हमसे.. तुम !!
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