"दिल की हर बात को बताया नहीं जाता , हर लफ़्ज को बयां किया भी नहीं जाता। हमको मोहब्बत है इस कदर उनसे , अब तो उनसे मिले बिना रहा भी नहीं जाता।"
क्यों कभी कोई इतना अच्छा लगने लगता है कि उससे अपना हर राज़ बताने को दिल करता है। उसे हमसफर बनाने का दिल करता है। अक्सर ऐसा क्यों होता है , हम चाहकर भी किसी को अपना नहीं कह सकते , जानते हैं हम भी कि उसे इतना चाहते हैं , फिर भी इज़हार करने से डरते हैं। न जाने क्यों , हम अपने दिल की बात ज़ुबां पर नहीं ला पाते और उसे अपने दिल में ही दफन कर देते हैं।
जिस चीज़ को जितना चाहते हैं, वह उतनी ही दूर नज़र आती है और अगर उसे पाना चाहें तो हम कभी उसे पा नहीं सकते। इसलिए जो दिल में होता है, उसे हम दिल में ही रखते हैं और दिल ही दिल में अपने दिल को समझा लेते हैं। जिसे चाहें उसे कह भी नहीं सकते , उसे भी नहीं जिसके लिए ये दिल धड़कता है।
उनकी एक झलक मुझे उनका दीवाना बना देती है , उनकी एक अदा मुझे पागल बना देती है , उनकी एक मुस्कान मुझे उनका कायल बना देती है और जब वह खुद सामने आते हैं तो मुझे खुद से बेगाना बना देती है।
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