आज मैं आपको अपने माता - पिता की प्रेम कहानी के बारे में बताती हूं। जरा देखें तो सही , जब हमारे माता - पिता को प्रेम हुआ था तब उनके जीवन में क्या हुआ था ? कैसे किया उन्होंने अपने प्रेम का इज़हार एक - दूसरे से और क्या उनके माता - पिता ने उनसे कुछ नहीं कहा और उनकी चुपचाप शादी करवा दी ? या फिर उनकी लव स्टोरी में भी कोई विलन बना ?
मेरे माता - पिता का प्रेम पॉंच साल तक चला। दोनों एक ही साथ काम करते थे और एक दूसरे के साथ ज्यादातर वक्त गुज़ारा करते थे। कहते हैं न कि मुलाकात लगातार होती रहे तो प्यार हो ही जाता है। उन्हें भी एक - दूसरे से प्यार हो गया। पर , इतनी जल्दी दोनों मिल जाते तो लाइफ में कोई ट्विस्ट नहीं होता न ! दोनों को एक दूसरे से प्यार था , यह बात दोनों में से कोई भी मानने को तैयार नहीं था। फिर क्या था कि मेरी मम्मी की शादी मेरे नाना - नानी ने कहीं और तय कर दी।
30 जून को शादी की तारीख तय हुई। 30 जून को दो प्यार करने वालों के बिछड़ने का दिन भी तय हो गया। जिन्दगी ने करवट ली और 23 जून को मेरे पिता ने मेरे नाना जी के घर पहुंच कर मेरी मम्मी को शादी के लिए प्रोपोज़ कर दिया। आर . के . पुरम के मन्दिर में जाकर नाना जी का आशीर्वाद लेकर उन्होंने शादी कर ली। भगवान सबकी जोड़ियां पहले से ही बनाकर भेजता है , इसलिए इनका मिलन तो होना ही था। आप सबके लिए भी कोई न कोई जरूर बना होगा।
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