मैंने जिससे प्यार किया ,
वह मेरे साथ ही ऑफिस में था। वैसे तो शुरूआत में हमारे बीच केवल दोस्ती थी
और हम हमेशा कहते थे कि हमारे बीच केवल दोस्ती ही रहेगा। पर ,
सच तो यह था कि हम दोनों ही एक-दूसरे से प्यार करने लगे थे। ऑफिस में
पहुंचते ही सबसे पहले हमारी नज़रें एक-दूसरे को ढूंढती और नहीं मिलने पर
बेचैनी सी होने लगती थी। सभी कहते थे कि हम दो जिस्म एक जान हैं ,
लेकिन वैलंटाइंस डे के दो दिन पहले मेरे ऑफिस में दो नई लड़कियां आई।
मैंने उन दोनों का नाम लेकर उसे चिढ़ाया और वह बहुत ज़्यादा चिढ़ गया। हम
चाय पी रहे थे और गुस्से में वह चाय छोड़कर ही चला गया। मुझे भी काफी बुरा
लगा। उसके बाद मैंने भी न उससे बात की और न तीन दिन तक खाना खाया। हमने हर
दिन मनाया , साथ में हर रोज़ विश करते थे , लेकिन जब वह खास दिन आया तो......
और वैलंटाइंस डे विश किया भी तो केवल मेल के जरिए। पर, शाम को उसने मुझे
फोन किया और फिर हमने घंटों बातें की। उसने सॉरी भी कहा। मैंने तो केवल
मज़ाक किया था , लेकिन उसका रूठकर जाना मुझे अच्छा नहीं लगा था। लेकिन , अगले दिन भी मैं उसे अपने दिल की बात नहीं कह पाई और न ही उसने मुझसे कुछ कहा। दोनों समझते हैं पर दोनों एक-दूसरे से कहना नहीं चाहते , क्योंकि वह मुस्लिम है और मैं हिन्दू। पर , दिल कहां इस दीवार को समझने वाला है और आज भी उसी से प्यार करता है और करता रहेगा। मैं उसे प्यार से बुद्धू कहकर पुकारती हूं।
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