मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि तुम्हें क्या गिफ्ट दूं ?
क्योंकि मेरे और तुम्हारे बीच के सारे रिश्ते अब टूट चुके हैं। इस रिश्ते
को मैंने अपने दिलोजान से जोड़ा था और एक-दूसरे का साथ निभाने का वादा भी
किया था। पर वह कितना कच्चा निकला। आज वह बंधन पल में टूट गया है। मैं
मानता हूं कि इस रिश्ते को तोड़ने की पहल मैंने ही की थी। मैं ही तुम्हारे
साथ नहीं रहना नहीं चाहता था।
फिर भी, मन में तुम्हारे लिए कुछ जगह थी और नन्ही-सी सृष्टि की डोर ने हम
दोनों को बांधे रखा था। आज वह भी टूट गई है। तुम अच्छी तरह से जानती हो कि
मैं यह रिश्ता तोड़ना नहीं चाहता था। तुमको मैंने अपने दिलोजान से भी
ज्यादा प्यार किया था। शायद तुम्हें याद होगा कि जब हम दोनों स्कूल में थे,
तब तुम मेरे कितने पास रहती थी और कितनी बातें किया करती थी।
लगता है तुम तो अब सबकुछ भूल चुकी हो। खैर... जब तुम आज को भूल गई हो तो कल को क्या याद रखोगी ? तुमने मुझे प्यार के बदले में नफरत दी। मैंने तुमसे प्यार किया, शायद यह मेरा कुसूर था। इसीलिए तो तुमने मुझे ठुकरा दिया। चलो , तुमने मुझे शायद इसलिए ठुकरा दिया कि हम तुम्हारी ठोकर के ही लायक थे और चलो , तुम्हारी ठोकर के काम तो आए। फिर भी हमारा नसीब तो देखो , हम तुम्हारे साथ ही चलते रहे।
यह जानते हुए कि तुम अब बदल गई हो , फिर भी हम अपने को नहीं समझा पाए। हम अपने-आपको क्या समझाते , हम तो खुद पागल हो गए। पर ,
हमें पागल करके तुम खुश होती रही और हम यह जानकर खुश होते रहे कि तुम तो
खुश हो। तुम्हारी खुशी की खातिर हमने गमों को भी अपना लिया। ज़िन्दगी में
मुझे बहुत खुशी मिली , लेकिन हम बदनसीब हैं , जो खुशी मिलते हुए भी हम खुश न रह सके।
जब भी ज़िन्दगी में कोई खुशी मिलती है , हर उस मौके पर तुमको ढूंढता हूं। सोचता हूं कि काश, तुम आज भी मेरे साथ होती तो क्या बात होती। यह सोचकर हम अक्सर रात की तन्हाइयों में रो पड़ते हैं।
हम तुम्हारे बारे में कितना सोचते हैं , कभी खुद को तो कभी खुदा को कोसते हैं।
ऐ खुदा , जब तुमने मेरा और ममता का साथ नहीं लिखा था तो तुमने मुझे उससे मिलवाया ही क्यों ? चलो, मिलवा भी दिया तो कोई बात नहीं, हमारी दोस्ती क्यों करवा दी ? चलो , दोस्ती भी करवा दी तो प्यार क्यों करवाया और अगर प्यार भी करवाया तो उसे पूरा क्यों नहीं करवाया ?
शायद मैंने तुमसे प्यार किया था , पर तुम्हीं ने मुझसे प्यार नहीं किया था। अगर तुम मुझसे प्यार नहीं करती थी तो मुझसे क्यों मिलती रही ? क्यों कहती थी कि मैं आपसे प्यार करती हूं। तुम्हारी झूठी बातों को मैं समझ नहीं पाया। तुम मुझसे प्यार का नाटक करती रही , पर असल में प्यार तुम महेश से करती थी।
मुझे इस बात का दुख नहीं कि तुम मुझसे प्यार नहीं करती थी। दुख तो इस बात का है कि तुम मुझसे झूठ बोलती रही। अगर तुम मुझसे शुरू में ही बोल देती
कि तुम मुझसे प्यार नहीं करती तो मैं तुमको कुछ नहीं कहता। अपने दिल पर
पत्थर रखकर अपने-आपको गमों के अंधेरों में धकेल देता। और धकेल तो लेता तब , जब मुझे उस लायक भी छोड़ा होता।
लोगों से सुना था, प्यार दीवाना होता है। हमारा ख्वाब था तेरे साथ जिन्दगी बिताने का ,
लेकिन हम नहीं जानते थे कि अक्सर ख्वाब तो ख्वाब ही रहते हैं। वे कभी पूरे
नहीं होते। सपने जितने आंख बंद करके देखो, उतना ही अच्छा होता है। खुली
आंखों से सपने कभी पूरे नहीं होते और आंखें खुलते ही सपने टूट जाते हैं।
दिल को बहुत दुख होता है , जब प्यार से प्यार जुदा होता है। कितना भुलाना चाहता हूं तुमको , लेकिन भूल कर भी नहीं भूल पाता हूं। प्यार की मदहोशी में क्या-क्या कर जाता हूं , लेकिन तुम तो नहीं मानोगी हमको रुलाने से।
हम ही हार गए तुम्हारी ज़िद के आगे , लेकिन तुम अपनी ज़िद को रोक न सके। हम अपने सपनों को रोक पाते , मगर तुम्हें तो कोई फर्क नहीं पड़ता। किसी के प्यार में रूठने की अदा हमको भी आती है , मगर काश कोई होता हमें भी मनाने वाला।
किसी के प्यार में गहरी चोट खाई है ,
वफा से पहले ही बेवफाई पाई है।
लोग तो दुआ मांगते हैं मरने की ,
पर हमने उसकी यादों में जीने की कसम खाई है।
दुश्मनों में भी दोस्त मिला करते हैं ,
कांटों में भी फूल खिला करते हैं।
हमको कांटे समझ कर छोड़ न देना ,
कांटे ही फूलों की हिफाज़त किया करते हैं।
हिफाज़त तो तब किया करते हैं न , जब कांटों को कोई छेड़ता है। उनको तो बड़ी बेदर्दी के साथ उखाड़ कर फेक दिया जाता है। फूलों को सब गले लगा लेते हैं , लेकिन कांटों से तो सभी नफरत करते हैं। ऐसा क्यों होता है कि कोई किसी से इतना प्यार करता है और किसी को कोई परवाह भी नहीं होती ? आखिर क्यों , ऐसा क्यों करते हैं लोग ? प्यार जब नहीं कर सकते तो क्यों खेलते हैं किसी के जज़्बातों के साथ ? और फिर कहते हैं कि हमारे साथ धोखा हुआ है। अगर तुम किसी से प्यार ही नहीं करोगे तो धोखा ही नहीं होगा और न ही कोई बर्बाद होगा।
हम तो लुट गए प्यार में ,
एक बेवफा की राह में
वह लौटकर नहीं आई ,
हम खड़े रहे रोड पर।
वह लौटकर ही नहीं आई , हम भागते रहे इन अजनबी रास्तों पर। कौन किसका होता है , सबका अपना-अपना नसीब होता है। हमारे नसीब में जो था, वह हमें मिल गया।
प्यार करके चोट हमने खाई है ,
इस ज़िन्दगी से बेहतर तो हमें मौत नज़र आई है।
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