मैंने नवम्बर 2006 , दीवाली के समय एक लड़की को देखा था , जिसका नाम पूजा है। उसे देखते ही मुझे उससे प्यार हो गया। मुझे देखते ही वह थोड़ा सा मुस्कुराई। वह मेरे घर के ही पास एक ही लेन में रहती है। जब मैं उसे चोरी छिपे देखता था , तो वह भी मुझे देखा करती थी। मैं ड्यूटी करता हूं। सुबह घर से निकलता हूं और रात को देर से पहुंचता हूं। मैंने उससे पूछा था कि क्या वह भी मुझे प्यार करती है ? लेकिन उसका कोई जवाब नहीं आया। बस , वह जब भी देखती है तो केवल मुस्कुराती है , जैसे इशारे में कुछ बोलना चाहती हो। मैं जब उसे इशारे में बुलाता हूं तो वह पास आती नहीं। मैं उसे बताना चाहता हूं कि मैं उससे बहुत प्यार करता हूं। उसके बिना जीने के बारे में सोच भी नहीं सकता।
Wednesday, 7 January 2015
कहो न कहो, आंखें बोलती है सनम..
मैंने नवम्बर 2006 , दीवाली के समय एक लड़की को देखा था , जिसका नाम पूजा है। उसे देखते ही मुझे उससे प्यार हो गया। मुझे देखते ही वह थोड़ा सा मुस्कुराई। वह मेरे घर के ही पास एक ही लेन में रहती है। जब मैं उसे चोरी छिपे देखता था , तो वह भी मुझे देखा करती थी। मैं ड्यूटी करता हूं। सुबह घर से निकलता हूं और रात को देर से पहुंचता हूं। मैंने उससे पूछा था कि क्या वह भी मुझे प्यार करती है ? लेकिन उसका कोई जवाब नहीं आया। बस , वह जब भी देखती है तो केवल मुस्कुराती है , जैसे इशारे में कुछ बोलना चाहती हो। मैं जब उसे इशारे में बुलाता हूं तो वह पास आती नहीं। मैं उसे बताना चाहता हूं कि मैं उससे बहुत प्यार करता हूं। उसके बिना जीने के बारे में सोच भी नहीं सकता।
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