मैं और हितेश क्लास टू से क्लासमेट थे। मैं उसे पसंद तो करती थी , लेकिन उसे कुछ कहने से डरती थी। 8वीं क्लास के बाद मैं हॉस्टल में चली गई और उससे मिले हुए काफी समय हो गया। वह क्या सोचता है ,
इससे मैं बिल्कुल अंजान थी। मुझे लगा कि मैंने अपना पहला प्यार खो दिया
है। हमेशा सोचती कि काश तुमसे कह दिया होता। 8 साल के लम्बे इन्तज़ार के
बाद समय ने हमें फिर से एक-दूसरे के सामने ला खड़ा किया। मैंने कभी सोचा भी
नहीं था कि इतना खूबसूरत लम्हा कभी आएगा। हमने एक-दूसरे को अपनी फीलिंग्स
को बारे में बताया। तब हमें पता चला कि हम दोनों ही स्कूल के समय से
एक-दूसरे को प्यार करते थे। हम काफी खुश हुए। मैं अपने प्यार के लिए कुछ
कहना चाहती हूं-
"ढूंढने से जिस अक्स की तलाश थी ,
मुझे ज़िन्दगी ने हंसीन मोड़ पर उससे मिला दिया।
खयालों में था जो मंजिल इस दिल की ,
खुदा ने उसे मेरी ज़िन्दगी का हमसफर बना दिया।"
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